फूलों की सौगात लेकर आया ऋतुराज बसंत,
धरती के सब कोने-कोने
पुष्प करें चहुँओर सत्संग।
सूर्योदय की आभा रक्तिम,
होए न उत्साह का अंत।
सिर ओढ़े पीली चुनरिया,
फूली सरसों सी लहराएँ,
मनु फूलों संग वे होड़ करें,
औ धरती पर रौनक लाएँ।
नयनों को शांति-शक्ति मिले,
बयार संग सौरभ उड़े,
तन प्रफुल्लित,मन हर्षित,
खुशबुओं का कोई अंत नहीं।
खगकुल का कलरव गूँजे,
पशु-धन भी करें कल्लोल,
षड् ऋतुओं का है सिरमौर,
प्रभु की तो लीला अनन्त।
सुषमा श्रीवास्तव, रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।




