
शब्दों कीमर्यादा(दोहा
मर्यादा नित राखिये, करना है सम्मान।
आदर सब को दीजिये, बनती है पहचान।।
मर्यादा रखभाव का, बोल दिये है घाव।
शब्द औषधि दे रहे, शब्द जताते ताव।
शब्द बोल मीठे लगें, शब्द लिए मन जीत।
शब्द प्रेम संसार है, जीवन की यह रीत।।
नश्तर से जो शब्द हों, पीड़ा मन भर देत।
कोयल मीठे बोल से, मन हर्षित कर लेत।।
शब्द भार लगते नहीं, कहने का हर ढंग।
बात वही सब बोलते, इक दूजे के संग।।
एक वचन सुख दे रहा, एक बिगाड़े काम।
संयम रख कर बोलिए, हो जाता है नाम।।
मर्यादा रत शब्द हों, सुखी रहे संसार।
मीठी वाणी बोलिए, जीवन है उपहार।।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




