साहित्य

तिरंगा

मधु माहेश्वरी

ताने जब अपना सिर ऊॅंचा
आसमान लहराए तिरंगा
आजादी की भीनी खुशबू
चहुं और फैलाये तिरंगा
शक्ति का संचार करें नित
सबक एकता का नित देता
भिन्न धर्म -जाति- भाषा की
सुंदर माला लगे तिरंगा
नहीं महज़ रंगों की पट्टी
अदम शौर्य की गाथा है ये
वीरों के निस्वार्थ त्याग की
सच्ची मूरत लगे तिरंगा
गंगा -जमुना -सरस्वती
वेद -पुराण और स्मृति
हिमालय से कन्याकुमारी तक
सबकी है पहचान तिरंगा
नहीं फ़र्क इसकी नज़रों में
हम सब हैं इसकी संतान
अपने शीतल आंचल  साए
रक्षा सबकी करें तिरंगा
साहस और बलिदान चाहिए
शांति और सौहार्द्र चाहिए
शस्य -श्यामला धरा चाहिए
ऐसा पाठ पढ़ाये   तिरंगा
सदा रखें मर्यादा इसकी
आओ ऐसा प्रण कर जाएं
अपना गौरव मयी तिरंगा
सिर ताने यूं ही लहराये
मधु माहेश्वरी

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