
चन्दौसी की धरा से उगा आज उजाला है,
इशिता ने परिश्रम से लिखा स्वर्णिम ज्वाला है।
निन्यानवे दशमलव सत्तावन की यह ज्योति कहे ,
मेहनत का हर आँसू बनता हीरे-सा उजियाला है।
आसमान भी झुककर बोले , बढ़ती जाओ बेटी,
सपनों की उड़ान में साहस ही रखवाला है।
तुम चलो दृढ़ पथ पर निडर, लक्ष्य स्वयं झुकेगा ,
तुममें भारत का उज्ज्वल कल, तुमसे ही उसका उजाला है।
ईश्वर करे आपकी यह उपलब्धि केवल शुरुआत हो —
आगे और भी ऊँचे शिखर आपका स्वागत करें, बेटी इशिता!
दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’
जनपद संभल उत्तर प्रदेश




