साहित्य

गलत को गलत कहने की आदत डाल लो

विद्यावाचस्पति डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

व्यंग्य वाणों की कोई कमी नही है,
अतः सुनने की आदत डालनी होगी,
टाँगे खींचने वालों की कमी नही है,
अतः उनसे बचने की सोचनी होगी।

रुलाने वाले हर जगह मिलते हैं,
अतः मुसुकाने की आदत डाल लो,
निरुत्साहित तो लोग करते ही हैं,
प्रोत्साहित होने की आदत डाल लो।

राहें भटकाने वाले तो हर जगह मिलेंगे,
सही राह जान लेने की आदत डाल लो,
सच का साथ देने वालों की कमी नही है,
गलत को ग़लत कहने की आदत डाल लो।

पतवार सम्भालते हुए नाविक हवा
की दिशा नहीं बदल पाता पर वह
पतवार को इस तरह से चलाता है
कि नाव सही दिशा में बढ़ती जाती है।

जीवन में अनेको झंझावात आते हैं,
हमें स्वयं अपने सद्गुणों के द्वारा इन
झंझावातों को दर किनार कर जीवन
नैय्या को आगे बढ़ाते जाना चाहिए।

ईमानदारी से कर्तव्य करने वालों
का शौक़ भले ही पूरा न हो सके,
परन्तु ऐसे कर्तव्यशील व्यक्तियों
की रात की नींद अवश्य पूरी होती है।

अच्छाइयाँ किसी न किसी रूप में
यकायक ही हमें मिलती हैं इसलिए
आदित्य दूसरों के लिए सदा अच्छा
सोचना व अच्छा ही करना चाहिए।

विद्यावाचस्पति डा० कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ

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