साहित्य

अंधियारे पथ में दीपक

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

मन मंदिर में दीप जला, जब नाम तुम्हारा गाया है
अंतर की हर पीड़ा ने तब, मीठा गीत सुनाया है।

नयन बंद कर देखूँ तुमको, हर श्वास में तुम बसते हो।
सुख-दुख के जीवन सागर में, तुम ही पथ को रचते हो।

रज-रज में तेरी महिमा है,कण-कण में तेरा वास है।
जग के हर एक जीव में छुपा, तेरा ही मधुर प्रकाश है।

जब-जब मन डगमग होता है, तुम थामे हाथ खड़े रहते।
अंधियारे पथ में दीपक बन, हर पल साथ जुड़े रहते।

न चाहत धन की,न यश की,बस तेरी भक्ति का आसरा।
तेरे चरणों में ही मिल जाता, जीवन का सारा उजियारा।

तुमसे ही आरंभ हमारा, तुम पर ही अंत ठहरता है।
तेरे प्रेम का एक कण भी, जीवन को अमृत करता है।

मेरा हर एक कर्म तुझे समर्पित, हर सांस तेरा गान बने।
ऐसा भगवत प्रेम मिले कि, जीवन सारा बलिदान बने।

तेरी माया में खोकर भी, तुझको ही पाने की चाह रहे।
हर जन्म में बस तेरे चरणों में, मेरा मन अनुराग रहे।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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