साहित्य

सुंदर शिक्षा देत जो , सच्चा शिक्षक मान ।

डा राजेश तिवारी

शिक्षक सम्मान सद्गुरु से संपन्न हो , यह ही है पहचान ।।

 

शिक्षक का सम्मान हो , ना ही नौकर मान ।

इसके ही सम्मान से , है जग का कल्यान ।।

 

शिक्षा से भर देत हैं , हृदय स्वा अभिमान ।

इनके शुभ कर्त्तव्य से , बनता देश महान ।।

 

ज्ञान बहुत ऊंचा रखें , कर विवेक से काम ।

विश्व गुरू भारत बने , होय जगत में नाम ।।

 

मात पिता गुरु तीन जो , अच्छे यदि मिल जाय ।

सौभाग्यी खुद को समझ , उसका जश जग गाय ।।

 

नैतिक शिक्षा भी पढ़ें, विषय कोइ भी होय ।

धर्म कर्म का मर्म भी , जान लेय सब कोय ।।

 

शिक्षक का सम्मान हो , सुंदर बनें समाज ।

मानवता जीती रहे , आवश्यक है आज ।।

 

जगे रहे सद्भाव उर , ऐसा करो उपाय ।

कर्म सदा ऐसे करो , जो सबही को भाय ।।

 

डा राजेश तिवारी मक्खन

झांसी उ प्र

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