
शिक्षक सम्मान सद्गुरु से संपन्न हो , यह ही है पहचान ।।
शिक्षक का सम्मान हो , ना ही नौकर मान ।
इसके ही सम्मान से , है जग का कल्यान ।।
शिक्षा से भर देत हैं , हृदय स्वा अभिमान ।
इनके शुभ कर्त्तव्य से , बनता देश महान ।।
ज्ञान बहुत ऊंचा रखें , कर विवेक से काम ।
विश्व गुरू भारत बने , होय जगत में नाम ।।
मात पिता गुरु तीन जो , अच्छे यदि मिल जाय ।
सौभाग्यी खुद को समझ , उसका जश जग गाय ।।
नैतिक शिक्षा भी पढ़ें, विषय कोइ भी होय ।
धर्म कर्म का मर्म भी , जान लेय सब कोय ।।
शिक्षक का सम्मान हो , सुंदर बनें समाज ।
मानवता जीती रहे , आवश्यक है आज ।।
जगे रहे सद्भाव उर , ऐसा करो उपाय ।
कर्म सदा ऐसे करो , जो सबही को भाय ।।
डा राजेश तिवारी मक्खन
झांसी उ प्र




