
आसमान में कितने सितारे हैं
तोड़ लाऊंँ क्या!!
इस ग़म-ज़दा ज़िन्दगी को वही,
छोड़ आऊंँ क्या!!
अब तक वादे वफ़ा ना हो पाए
किसी और की कसम मैं खाऊंँ क्या!!
तूने नाराज़ कर दिया मुझको
मैं भी नाराज़ तुझसे हो जाऊंँ क्या!!
ज़िन्दगी तन्हा कैसे गुज़रेगी
तू कहे तो तेरे घर आऊंँ क्या!!
बहुत दिनों से दिल टूटा नहीं है
एक बार तुझको आजमाऊँ क्या!!
यक़ीन नहीं मुझको किसी बात पर
तुझको अपना यक़ीन मैं दिलाऊँ क्या!!
ना जाने रात कितनी लंबी होगी
दे अगर इशारा तो बहक जाऊंँ क्या!!
घर मेरा तोड़ कर वह कहता है
ख़्वाब तुझे महलों के मैं दिखाऊँ क्या!!
दिन बदलने में कितने दिन लगते हैं
मैं भी तेरे जितना मशहूर हो जाऊंँ क्या..!!
स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान



