साहित्य

भगवान परसुराम

डा राजेश तिवारी मक्खन

ये पड़े प्रसून पृथ्वी पे प्रभु परशुराम पधारे हैं ।
अन्यायी थे नृपत जो भी वही इनने संहारे हैं।।

अच्युत के आप अवतारी आज अवनी पर आए थे ।
ऋषि मुनि जो तपस्यारत आप सबही को भाए थे ।।
नहाने ब्रह्म बेला में आते गंगा किनारे हैं ।
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भृगु कुल वंश भास्कर हो उजाला उर में कर दीजे ।
दुखी जो ब्राह्मण पृथ्वी पर दया की दृष्टि अब कीजे ।।
द्विज का दूसरा नहीं कोई आपके ही सहारे है ।
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आपके शिष्य धनुष धारी , आपकी कीर्ति है न्यारी ।
चिरंजीवी हो प्रभु तुम हो , नाज हमको भी है भारी ।।
रेणुकानन्दन सहस्त्रवंदन गूजते जय के नारे है ।
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अधिक दुखी विप्र धेनु हैं कृपा की दृष्टि प्रभु कीजे ।
विप्र सब कर रहे विनती , शरण में आप ले लीजे ।।
मक्खन मनसे नमन करते आप जिनके प्यारे हैं।
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डा राजेश तिवारी मक्खन
झांसी उ प्र

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