
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाए,
नज़रें कमज़ोर होती जाएँ।
छोटे अक्षर धुँधले दिखते हैं,
पर मन की आँखें सब पढ़ जाएँ।
छोटी बातों को दिल पर लेना,
अक्सर आदत बन जाती है।
सही कौन है, गलत कौन,
इसी में बात बिगड़ जाती है।
शब्दों से किसी को चोट न देना,
शब्दों में बहुत ताक़त होती है।
बोले गए वो पल भर के बोल,
दिल पर उम्र भर छप जाते हैं।
गुस्से में कही गई बातें,
तीर बनकर लग जाती हैं।
बाद में माफी माँग भी लो,
पर यादें वहीं रह जाती हैं।
इसलिए थोड़ा ठहर कर बोलो,
दिल को पहले सोच समझने दो।
हर बात जीतनी ज़रूरी भी नहीं,
कुछ बातों को नज़रअंदाज़ कर दो।
रिश्ते तो किताब जैसे होते हैं,
उसका हर पन्ना प्यार से पलटो।
अगर कहीं स्याही फैल जाए,
समझदारी से उसे पोंछ लो।
ये जीवन छोटा सा सफ़र है,
मुस्कानें अपने साथ ले चलो।
छोटी-छोटी बातों में उलझकर,
अपनों को दूर मत ढकेलो।
सुमन बिष्ट, नोएडा



