आलेख

विश्व अर्थ डे पर विशेष

विवेक रंजन श्रीवास्तव

धरती केवल मिट्टी और पानी का नाम नहीं, यह हमारी साँसों की धड़कन है। वह अदृश्य धागा है जो जीवन को धड़कन देता है। जब हवा शुद्ध होती है, जल निर्मल होता है और वृक्ष हरियाली से लहराते हैं, तभी जीवन का संगीत मधुर होता है।

विश्व अर्थ डे पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम प्रकृति को केवल उपभोग की वस्तु न मानें, बल्कि उसे संरक्षित करने का कर्तव्य निभाएँ। – धरती माँ है, इसे बचाना हमारी जिम्मेदारी है। हर पौधा भविष्य की साँस है। जल बचाओ, भविष्य बचाओ। प्रकृति का सम्मान ही मानव का उत्थान है।

छोटे-छोटे प्रयास ,जैसे वृक्षारोपण, ऊर्जा की बचत और प्लास्टिक का कम से कम उपयोग , धरती को स्वस्थ और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित बना सकते हैं।

संदेश यही है कि यदि हम धरती को सँवारेंगे, तो धरती हमें जीवन से भरपूर रखेगी। यही विश्व अर्थ डे मनाने का सच्चा प्रयोजन है।

विवेक रंजन श्रीवास्तव भोपाल

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