साहित्य

मानव एकता दिवस पर हिंदी कविता

पंडित मुल्क राज "आकाश"

अमन एकता के मसीहा, बाबा गुरबचन थे आए।
मानवता के शुष्क धरा पर, करुणा मेघ बरसाए।

सत्य निष्ठा के संवाहक, बन सब संशय का नाश किया,
हर मानव है रूप प्रभु का, सबको अनमोल सबक दिया।

लहू न नाली, नाडी में हो, यह उद्घोष था महान,
देर्श भाव मिटा दुनिया को, दिया प्रेम का सम्मान।
समरसता के सूत्रधार बन, घर-घर जोत जलाई,
मिथ्या भेद अहम की दीवारें, पलभर मैं ढाई।

अमन के पावन प्रेरणा थे वो, सत्य के सजक प्रहरी,
ज्ञान की अविरल धार बहाई, जो अतिशय गहरी।
मानवता की खातिर अपने, प्राणों का बलिदान दिया।
नफरत की सब हटा दीवारें, आपने पावन संदेश दिया।

नमन नूरानी उस रहबर को, जो सत्य के संवाहक थे।
विचलित मन के उपवन में, शीतल कुंज महानायक थे।
गुरु वचन का दिव्य रूप आज भी, मन हर लेता है
मानव एकता दिवस पर, जीवन प्रेरणा देता है।

पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश

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