
हवा में जहर बिखरा है
जरा सांसे
बचा कर रख
जल में विष घुला है
तू प्यासें
बचा कर रख
बेवक्त मौसम बदलते हैं
जरा धङकने
बचा कर रख
यह फल सब्जी सब पर
जहर छिङका है
तू आंते बचा कर रख
सारे शहर पत्थर के
जरा मिट्टी
बचा कर रख
जंगल कट गये कब के
तू गमले
बचा कर रख
सुभाष सलूजा




