आलेख

पर्यावरण एवं प्रकृति से छेड़छाड़ का मतलब सृष्टि का विनाश

सुरेंद्र कुमार बिंदल

यदि हमारा पर्यावरण स्वच्छ रहेगा। तो पूरा वायुमंडल भी स्वच्छ रहेगा। पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए हमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना पड़ेगा। पेड़ की कटाई पर प्रतिबंध लगाना पड़ेगा। यदि सब लोग इस तरह के पुण्य काम करने लग जाए। तो वातावरण भी स्वच्छ रहेगा ।पेड़ पौधे भी हरे भरे रहेंगे। मनुष्य को पशु पक्षियों को शुद्ध प्राण वायु ऑक्सीजन मिलेगी ।कई तरह की आयुर्वेदिक औषधि मिलेगी। कई तरह के रोगों से निजात मिलेगी। शुद्ध फल , सब्जियां खाने को मिलेगी। यदि हम पर्यावरण को स्वच्छ रखेंगे। उसके लिए आबादी वाले इलाकों से बाहर इंडस्ट्रीज लगानी चाहिए। ताकि उनका गंदा केमिकल पानी खेतों में ना जा सके। और खेतों में निकास न कर सके। उससे भी जानलेवा बीमारियों को न्योता मिलता है। और प्रदूषण पैदा होता है। जिससे श्वास की बीमारी दमा की बीमारी त्वचा की बीमारी अन्य कई तरह की बीमारियों को जन्म देती है। जिनका इलाज असंभव है। यदि हम इन सब का खंडन करते हैं। और ध्यान नहीं देते हैं। तो आने वाले समय में पूरे देश में प्रदूषण इतना हो जाएगा। कि लोगों को सांस लेना भी असंभव हो जाएगा। कई तरह के रोग लग जाएंगे। जिसका इलाज करना बहुत मुश्किल होगा। धन का अपव्यय होगा। भीषण गर्मी पड़ेगी भीषण ठंड पड़ेगी भीषण बरसात पड़ेगी। जिसके कारण से सुनामी आ सकती है। जन धन संपत्ति की हानि हो सकती है। इसलिए पर्यावरण बचाओ मनुष्य जीव जंतु की रक्षा करो। वायुमंडल की रक्षा करो। देश की रक्षा करो। अधिक से अधिक वृक्षारोपण करो। जीवन को खुशहाल बनाओ।
सुरेंद्र कुमार बिंदल वरिष्ठ पत्रकार लेखक एवं रचनाकार मॉडल टाउन जयपुर राजस्थान।

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