
# नमन मंच 🙏
# दिनांक- १६/६/२०२६
# वार- मंगलवार
# विषय- स्कूल चले हम
# विधा – काव्य
स्कूल चले हम फिर तो पढेंगे हम जेल से जैसे हों आजाद फिर तो नहीं करेंगे हम व्यर्थ समय यूं ही बरबाद।
पढ़-लिख कर व खेल कर हम होंगे बड़े आबाद,शिक्षार्थ स्कूल जाएं हम सेवार्थ हो आएं हरदम।
स्कूल का नाम रौशन करके देश को रौशन कर दें हम,स्कूल चले हम, स्कूल चलें हम घर से अपने- स्कूल चले हम।
हरा के उस को-रो-ना को अपने-अपने स्कूल चलेें
हम बीच का बंदर खेलेंगे स्टप्पू भी अब खेलेंगे हम।
लुक्का-छुप्पी खेलेंगे चोर-सिपाही खेलेंगे एक-दूजे संग दौड़ें हम प्रेम के धागे जोड़ें हम।
मिलजुल जीना सीखें हम कदम से सबके मिला कदम,स्कूल चले हम, घर से अपने-स्कूल चलें हम।
पढ़-लिख कर नवाब बनेंगे हम,माँ पिता का नाम रोशन करेंगे ज्ञान के दीप जलाएंगे हम।
शिक्षक, ज्ञानी,डॉक्टर,फ़ौजी,वकील, पुलिस अधिकारी, IAS,PSS जो चाहे पढ़-लिख कर सबकुछ बन जाएंगे हम।
ऑनलाइन से पढ़ेंगे हम ऑलराउंडर बनेंगे हम, फालतू मीडिया छोड़कर नॉलेज ही चुनेंगे हम चलो स्कूल चले हम।
घर में योग करेंगे हम इंडोर खेल करेंगे हम,प्रातः जल्दी उठ करके वॉकिंग भी करेंगे हम चलो स्कूल चले हम।
स्वरचित एवं मौलिक रचना✍️
संगीता वर्मा, कानपुर उत्तर प्रदेश




