साहित्य

हनुमान

डॉ गीता पाण्डेय "अपराजिता"

शिव जी के अवतार हैं,विद्या बुद्धि अकूत।
रोग नाश तन का करें,मांँ अंजनी सपूत।
महावीर हनुमान का,ऋषि मुनि जपते नाम,
भक्त प्रवर हैं इस जगत,बने राम के दूत।।

सिया राम जी उर बसें,पवन पुत्र हनुमान।
चमत्कार करते सदा,दूजा नहीं समान।
भक्तों पर करते कृपा,जो भी जपता नाम,
माँ सीता ने है दिया,अष्ट सिद्धि का ज्ञान।।

भक्त शिरोमणि हैं बने, महावीर हनुमान।
साहस संयम उर भरा, अतिशय हैं बलवान।
जपते रहते हैं सदा, सियाराम का नाम,
अजर-अमर का है दिया,सीता ने वरदान।।

मानवता के रूप में,सदा से बिराजें राम।
कलयुग का आधार हैं,जपो सभी जन नाम।
शनि की मिलती है कृपा,पढ़िए बजरंँग बाण,
पूर्ण सभी हों कामना,सुखमय होता धाम।।

बजरंगी प्रभु भक्त हैं,विनय करें स्वीकार।
जो अभी आता है शरण,उसका हो उद्धार।
राह कठिन बनती सरल, जिसके सिर पर हाथ,
बढ़े भक्ति से शक्ति है,नश्वर इस संसार।।

अपना बस चलता नहीं,फल दाता भगवान।
विविध रंग की जिंदगी,करना कर्म महान।
ईश्वर सब है देखता, लेखा-जोखा साथ,
कर्मों के अनुरूप ही,फल देते हनुमान।।

विद्या बुद्धि अपार है,भक्त शिरोमणि रूप।
रचे विविध अभिलेख हैं,महिमा बड़ी अनूप।
अतुलित बल के धाम हैं,करें दुष्ट का नाश,
संदर्शी शुचि दृष्टि है,निर्धन हो या भूप।।

डॉ गीता पाण्डेय “अपराजिता”
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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