साहित्य

संकट मोचक

सुषमा श्रीवास्तव

आए हैं बजरंग हमारे, संकट सभी मिटाते,
संग हैं अपने लाए, मेघ कृपा के बरसाते।
दयानिधान,कृपा निधान हैं संकट मोचक,
दीनों के दु:खहर्त्ता हैं,प्रभु-पताका लहराते,
पल में प्रभु का काज करें,भक्तों को हर्षाते।
मातु सिया-पुत्र कहाते,अनुज लखन अहाते
सियाराम को उर बैठाए, राम-नाम हैं गाते।
आए हैं बजरंग हमारे, संकट सभी मिटाते,
अंजनिसुत मंगल को जन्में, मंगल ही करते
कलयुग में शाश्वत होकर चिरंजीवी कहाते।

रचनाकार —
सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक सृजन, सद्यः निःसृत,©®, रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।

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