
कभी जिक्र किया नहीं
तुमने कहा नहीं
उन प्रेम पत्रों में किस्से कहानियाँ और
कविताएँ अधूरी लिखी हुई हैं
मैंने उम्र दराज कुछ पन्नों में
कभी तुमने सोचा क्या तुमने लिखवाई क्या?
अगर सुन सकते हो तो मनप्रीत सुनो!
अपेक्षाओं की सांझ लिखी टूट रही
उम्मीदों की बात लिखी गोधूलि
किरणों की पुकार लिखी उन अतृप्त
अदृश्य प्रीत की अनदेखी अनुराग लिखी
शायद किसी प्रेमपत्र में किसी
ने लिखा नहीं होगा
वह सारी बात लिखी बोलो
क्या पुनः सौन्दर्य लिख पाऊंगी या
संवेदना पुष्प कहलाऊंगी।
*• अभिलाषा श्रीवास्तव, गोरखपुर, उ.प्र.।*




