साहित्य

गीत

डॉ गीता पाण्डेय

मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे में, बाँट दिया भगवान को।

जाति धर्म की दीवारों से, खो बैठे पहचान को।।

 

स्वार्थ भावना उर में पलती, तोड़े जन विश्वास है।

द्वेष दम्भ चहुँ दिशि में फैला, किससे करती आस है।।

प्रेम दया अरु करुणा भूले भूले प्रभु अहसान को।

मंदिर मस्जिद ———-

 

रंग बिरंगा मानव दिखता, रंग भरा पर लाल है।

वही दौड़ता सबके तन में, फिर भी करें बवाल है।।

मानवता लज्जित हो जाती, सहकर के अपमान को।

मंदिर मस्जिद———-

 

ईश्वर की हम सब संताने, धर्म-कर्म सब एक हो।

बुद्धि कभी मत गलत चलाओ,उर विचार शुभ नेक हो

अंबर बाँटा धरती बाँटी, बांँट दिया इंसान को।

मंदिर मस्जिद——–

 

सतत् वाहिनी नदियों सम, एक धार में हम बहें।

कभी नहीं संत्रास बढ़ाएंँ, दूर प्रलोभन से रहें।।

वीर सपूतों की कुर्बानी, मत भूलो अवदान को।

मंदिर मस्जिद———

भूल रहे हैं संस्कृति अपनी, नहीं किसी को भान है।

जन्म लिए जो इस धरती पर,रखो सभी का मान है।।

चलो सहेजे थाती अपनी, बेचें मत ईमान को।

मंदिर मस्जिद———-

 

डॉ गीता पाण्डेय अपराजिता

सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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