साहित्य

बड़ों का आशीर्वाद,,,

सौ, भावना मोहन विधानी

बड़ों का आशीर्वाद,
रहे सदा हमारे साथ।
जाने कब किस समय?
छूट जाए उनका हाथ।

बुजुर्गों की खामोशी भी,
बहुत कुछ कह जाती है।
उनकी दी हुई दुआएं,
हर पल अपना असर दिखाती हैं।

घर की छत होते हैं बुजुर्ग,
आशीर्वाद हमारा जीवन बना देता है।
बुजुर्ग बिना घर सूना सूना,
समस्याओं को कठिन बना देता है।

बुजुर्गों को दो हमेशा सम्मान,
दिल उनका खिल जाता है।
पल दो पल बैठो पास उनके,
चेहरा उनका मुस्कुराता है।

बड़े ही हमारे ईश्वर है,
करो उनकी दिन रात सेवा।
उनके आशीर्वाद से ही,
पा जाओगे खुशियों का मेवा।

सौ, भावना मोहन विधानी
अमरावती महाराष्ट्र।

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