साहित्य

मिल गए नैन भोले

कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी 'राम'

भोले से मिल गए मेरे नैन,

मिल गया हमको कितना चैन,

नहीं मिलते जब भोले तो,

ये मन हो जाता है बेचैन।

भोले से मिल …

बिना भोले हमारा तो,

गुजारा भी नहीं होता,

जो भोले पास होते हैं,

नजारा खास होता है।

भोले से मिल …

नजर जब पड़ती भोले की,

सुखद अहसास होता है,

नजर कोई नहीं आता,

जब भोले का साथ होता है।

भोले से मिल …

चरण पड़ते जब भोले के,

पावन तब वास होता है,

महक जाता है आंगन भी,

भोले का राग होता है।

भोले से मिल …

आओ भक्ति का पाठ पढ़ें,

नित भोले का ध्यान धरें,

मन गंगा की धार बहे,

कुछ ऐसा काम करें।

भोले से मिल ….

(268/326वां मनका)

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कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी ‘राम’

गांधीनगर इन्दौर (म.प्र.)

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