
भोले से मिल गए मेरे नैन,
मिल गया हमको कितना चैन,
नहीं मिलते जब भोले तो,
ये मन हो जाता है बेचैन।
भोले से मिल …
बिना भोले हमारा तो,
गुजारा भी नहीं होता,
जो भोले पास होते हैं,
नजारा खास होता है।
भोले से मिल …
नजर जब पड़ती भोले की,
सुखद अहसास होता है,
नजर कोई नहीं आता,
जब भोले का साथ होता है।
भोले से मिल …
चरण पड़ते जब भोले के,
पावन तब वास होता है,
महक जाता है आंगन भी,
भोले का राग होता है।
भोले से मिल …
आओ भक्ति का पाठ पढ़ें,
नित भोले का ध्यान धरें,
मन गंगा की धार बहे,
कुछ ऐसा काम करें।
भोले से मिल ….
(268/326वां मनका)
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कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी ‘राम’
गांधीनगर इन्दौर (म.प्र.)




