साहित्य

झारखंड 

किरण कुमारी 'वर्तनी

-भिन्न पंछी का डेरा ,झारखंड कहलाये।

धरा गर्भ में खनिज समेटे ,मानव खींचे आये।

 

हर मौसम ही लगे सुहाना ,चहुँ दिशि है हरियाली।

रंग-बिरंगे फल- फूलों से ,सजी हुई है डाली।

गली सड़क हर चौराहे को ,खुशबू से महकाये।

भिन्न-भिन्न पंछी का डेरा ,झारखंड कहलाये ।।

 

खूब लड़े थे अंग्रेज़ों से, स्वतंत्रता सेनानी।

नाम प्रथम था तिलका मांझी ,पिला दिए थे पानी।

शौर्य सिद्धू ,कान्हू, बिरसा की ,नानी कथा सुनाये।

भिन्न-भिन्न पंछी का डेरा ,झारखंड कहलाये ।।

 

है तडाग झरना नंदियों में ,बसी संस्कृति धारा।

चट्टानों तुंग पहाड़ों में, है धार्मिक स्थल प्यारा।

जल थल तरु पशु को जन पूजे ,प्रकृति प्रेम दर्शाये।

भिन्न-भिन्न पंछी का डेरा, झारखंड कहलाये ।।

 

झारखंड राज्य बनाने में, प्रमुख शिबू अगुवाई ।

अब ‘दिशोम गुरु’से जग जाने, सच्चे थे यह भाई।

विश्व पटल पर झारखंड का , ये ही मान बढ़ाये।

भिन्न-भिन्न पंछी का डेरा, झारखंड कहलाये।।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!