
पसीने की हर बूंद में,
सपनों का संसार है,
मजदूर के हाथों में,
जीवन का है आकार ।
धूप-छांव में तपककर जो,
दुनिया को संवारता है,
असली नायक है वह,
जो चुपचाप निखारता है।
ईंट, पत्थर को जोड़कर,
महलों को जो बनाता है,
खुद टूटी झोपड़ी में,
सारा जीवन बिताता है।
रोटी की आस लिए,
हर दिन वह निकल पड़ता है,
अपने ही संघर्षों से वह,
इतिहास नया गढ़ता है।
न कभी उसके नाम की चर्चा,
न कभी कोई सम्मान है मिलता,
फिर भी उसके श्रम से,
हर कोना महकता है।
धरती से अंबर तक,
उसकी ही पहचान है,
उसके बिना अधूरा है,
हर एक निर्माण है।
आओ आज प्रण लें हम,
सभी उसका मान बढ़ाएं,
मेहनत के हर हाथ को,
सम्मान हम दिलाएं।
मजदूर दिवस पर यही
सच्चा उपहार होगा,
हर श्रमिक के चेहरे पर,
खुशियों का संचार हो।
डॉ अरुणा
राजकीय कन्या वरिष्ठ विद्यालय जसौर खेड़ी, झज्जर (हरियाणा)




