साहित्य

मुक्तामणि छंद

राम किशोर वर्मा

इक-दूजे से सब बँधे, अधिकारी हो नाई ।
श्रमिक बिना जीवन नहीं, श्रमिकों बहुत बधाई ।।१।।
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भवन बनाने की कला, श्रमिकों को ही आती ।
कठिनाई से ज़िन्दगी, कच्चे घर कट जाती ।।२।।
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पढ़े-लिखे होते नहीं, श्रम का उन्हें सहारा ।
कुआँ खोदते रोज ही, जल पी करें गुजारा ।।३।।
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लाला के भण्डार पर, चलती सदा उधारी ।लगी ब्याज की कष्टकर, जीवनभर बीमारी ।।४।।
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श्रमिकों के उत्थान को, सरकारें हितकारी ।
मुफ्त गैस राशन मकां, ब्याज रहित धन सारी ।।५।।
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श्रमिकों के बच्चे पढ़ें, सुविधाएं दीं भारी ।
भोज वस्त्र बस्ता सभी, मुफ्त स्कूल में सारी ।।६।।
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बदले हुए समाज से, श्रमिक स्वयं ही चेता ।
जागरूकता आ गयी, अब उनके हैं नेता ।।७।।
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श्रमिकों के हित में रखें, मानवता का नाता ।
उससे बने समाज है, देश भी नाम कमाता ।।८।।
*-राम किशोर वर्मा*
जयपुर (राजस्थान)

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