संघर्ष, सेवा और संवेदनशीलता की मिसाल हैं डॉ. कमलेश कुमार

संघर्ष, सेवा और संवेदनशीलता की मिसाल हैं डॉ. कमलेश कुमार
समाचार संकलन : कुमार संदीप (सिमरा, बंदरा, मुजफ्फरपुर)
मुजफ्फरपुर। बंदरा प्रखंड अंतर्गत सिमरा गांव की पावन धरती पर 15 फरवरी 1986 को जन्मे डॉ. कमलेश कुमार आज संघर्ष, सेवा और सामाजिक समर्पण के पर्याय बन चुके हैं। एक साधारण मजदूर-किसान परिवार में जन्म लेकर उन्होंने अपने अथक परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति और सेवा भावना के बल पर समाज में एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है।
डॉ. कमलेश कुमार के पिता सुखदेव महतो एवं माता ने कठिन परिस्थितियों के बीच अपने पुत्र को संस्कार, ईमानदारी और परिश्रम की शिक्षा दी। इन्हीं मूल्यों ने उनके व्यक्तित्व को संवेदनशील और समाजोपयोगी बनाया। आर्थिक अभावों के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को मरने नहीं दिया और शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी शक्ति माना।
बचपन से ही शिक्षा के प्रति उनका विशेष लगाव रहा। गांव के विद्यालयों में अध्ययन के दौरान ही उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना शुरू कर दिया था। पाँचवीं कक्षा से ही छोटे बच्चों को पढ़ाना आरंभ कर देना उनकी शिक्षण क्षमता और समाज के प्रति समर्पण का प्रमाण है। लगभग बारह वर्षों तक उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहकर अनेक विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया और उन्हें बेहतर भविष्य की दिशा दिखाई।
सामाजिक चेतना से ओतप्रोत डॉ. कमलेश कुमार छात्र जीवन से ही जनहित के कार्यों में जुड़े रहे। उन्होंने भाकपा माले के माध्यम से गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई तथा सदैव सामाजिक न्याय और जनसेवा के पक्षधर बने रहे। समाज के कमजोर वर्गों के प्रति उनकी संवेदनशीलता ने उन्हें लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया।
चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने चिकित्सा को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का माध्यम माना। एक्यूप्रेशर चिकित्सा के क्षेत्र में उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में कार्य करते हुए हजारों लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सहायता प्रदान की। उनकी सेवा भावना, संगठन क्षमता और नेतृत्व कौशल के कारण उन्हें कई महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए। वर्तमान में वे AKF ग्रामीण चिकित्सक मंच ऑल इंडिया के राष्ट्रीय संगठन मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए वर्ष 2025 में उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके समर्पण, परिश्रम और समाजहित में किए गए कार्यों का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है।
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता लगातार बनी रही। वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में वे पंच पद पर निर्वाचित हुए। यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं थी, बल्कि जनता द्वारा उनके प्रति व्यक्त किए गए विश्वास और सम्मान का प्रतीक थी। उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए जनसमस्याओं के समाधान और समाज के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए।
जीवन की राह में उन्हें कई कठिन परीक्षाओं का भी सामना करना पड़ा। 22 फरवरी 2025 को सड़क दुर्घटना में उनके छोटे भाई रत्नेश कुमार निराला का असामयिक निधन हो गया। यह घटना उनके जीवन की सबसे पीड़ादायक स्मृतियों में से एक है। इस असहनीय दुःख ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया, लेकिन डॉ. कमलेश कुमार ने धैर्य और साहस का परिचय देते हुए स्वयं को संभाला और समाज सेवा के अपने संकल्प को कमजोर नहीं पड़ने दिया।
डॉ. कमलेश कुमार का जीवन इस बात का उदाहरण है कि यदि व्यक्ति में दृढ़ इच्छाशक्ति, सेवा भावना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव हो तो वह किसी भी कठिन परिस्थिति को पार कर सकता है। उनका संघर्षमय जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
व्यक्तिगत रूप से भी वे अपने स्नेहिल व्यवहार और प्रोत्साहन के लिए जाने जाते हैं। लेखक कुमार संदीप बताते हैं कि कमलेश जी अनमोल विचार के धनी हैं। समाज के अनमोल प्रहरी हैं जो समाज में सहयोगात्मक भाव रखते हैं।
संघर्षों से तपकर समाज सेवा की राह पर आगे बढ़ने वाले डॉ. कमलेश कुमार आज न केवल अपने गांव और क्षेत्र, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।यह समाचार समाचारपत्र, स्मारिका या सम्मान विशेषांक में प्रकाशित करने योग्य शैली में तैयार किया गया है।




