साहित्य

विश्व तंबाकू निषेध दिवस

मुकेश कुमार सोनकर

तंबाकू छोड़ो, जीवन जोड़ो”

तंबाकू है एक धीमा ज़हर,

जो जीवन को करता बेअसर।

पहले आदत, फिर लत बन जाती,

सुख-शांति सब दूर भगाती।

 

कैंसर जैसे भयावह रोग अनेक,

देता यह दुख और कष्ट अशेष।

धुएँ से भरता तन और मन,

छीन लेता जीवन का हर धन।

 

निरोगी काया का यह है दुश्मन,

संकट में आता इससे तन मन।

जो इसकी गिरफ्त में आता,

स्वस्थ जीवन से दूर हो जाता।

 

आओ मिलकर शपथ उठाएँ,

तंबाकू से नाता तोड़ जाएँ।

स्वस्थ रहें और स्वस्थ बनाएँ,

नया भारत हम सब सजाएँ।

✍️मुकेश कुमार सोनकर,

रायपुर छत्तीसगढ़ @

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