
बिन खून के रिश्ते से जो मिले वो दोस्त है
दोस्त बिना अधूरी रहता जीवन सारा |
दोस्त अगर सच्चा तो दुनियां से डरना क्या
साथी बन जाता रिश्ता निभाता हर डगर |
वही दोस्त सच्चा बात कडंवी मुंह पर कहे
पीठ पीछे सदा उसकी बढ़ाई करता रहे |
दोस्त अकेला एक हो दिल की जो कह सके
दोस्ती निभा सच की राह जो सच में बता रहे |
बचपन की दोस्ती जिंदा रहती है हमेशा सदा
आज के दोस्त मुसीबत में हाथ छोड़ देते हैं |
पुराने वो साथी जो खेल सदा एक होकर रहे
दूर भी हों अगर तो फोन पर बात करते रहे |
वही मित्रता सच्ची है जो दिल से निभई तुमने
कृष्ण सुदामा सी दोस्ती सदा अपनी बनाई हमने |
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण छतरपुर मध्यप्रदेश




