
साजन और बरसात,
जैसे चोली दामन का साथ।
रिमझिम बरखा को देख,
आ जाती है पिया की याद।
बारिश की बूंदों में भीगा मन,
पिया की यादों से महका आंगन।
घटाओं में तेरा चेहरा नजर आए,
सावन में तुझ बिन रहा न जाए।
बारिश में आज भीग जाए ऐसे,
बरसों बाद पूरी हो तमन्ना जैसे।
तुम्हारा हाथ थामें यूं चलती रहूं,
तुमसे सारी दिल की बात कहूं।
तुम्हारा सहारा ही दिल की राहत,
तुम्हें पाना ही है मेरी चाहत।
हर जन्म तुम मिलो दिल की आस,
कुछ ना मिले पर तुम रहो पास।
सौ, भावना मोहन विधानी ✍️
अमरावती महाराष्ट्र।




