पावन सावन मास में है,शिवमय लगे सारा संसार।
शिव भक्ति में डूबे हैं,सभी सनातन धर्मी परिवार।।
कोई कहे सावन आया,कोई कहे श्रावणी त्योहार।
शिवलिंग पर भक्त चढ़ाएं,दूध दही जल की धार।।
सावन माह सनातन धर्म में,हिंदुओं की शिवभक्ति।
काँवरिए करें शिवधाम में,जलाभिषेक शिवशक्ति।।
शिवेश्वर महादेव भोला संग,विराजें माँ गौरी शक्ति।
शिव गौरी गणेश सपरिवार,संग करते नंदी भक्ति।।
कोई जाए सेतुबंध रामेश्वरम,कोई है वैद्यनाथ धाम।
कोई बाबा बेलखर नाथ, कोई घुष्मेश्वरनाथ धाम।।
कोई पडींलन महादेव, तो कोई सोमेश्वरनाथ धाम।
कोई प्रतापेश्वर महादेव,कोई केदारनाथ जी धाम।।
हर जगह हर प्रान्त देश में,स्थित शिव मंदिर जाते।
शिवलिंग पर जल पुष्प,धतूर बेलपत्र दूध चढ़ाते।।
नंगे पाँव कान्ध काँवर ले,गेरुए वस्त्र में भक्त जाते।
बाजे-गाजे संग काँवरियों को,विदा करने हैं आते।।
शिव भक्ति में लीन रहते,शिवमय ही सारा संसारा।
शिव एवं शिव भक्तों को,प्रिय सावन मास प्यारा।।
सावन में शिवजी के मंदिर का,सुन्दर दिखे नजारा।
शिव भक्तों की भीड़ उमड़े,शिव का हो जयकारा।।
सावन में हर दिन प्रिय होता,विशेष प्रिय सोमवार।
कुछ निर्जला व्रत भी रखते,कुछ करते फलाहार।।
हरेक वर्ष में सावन विशेष,महत्व का होता है यार।
कभी सावन संग,अधिक मास भी होता सरकार।।
शिव भक्तों को बड़ा प्रिय होता,सावन का महीना।
भाँग धतूर मदार जल,चढ़ते शिव को पूरे महीना।।
शिव मंदिरों में अखंड शिव,जाप का यही महीना।
शिवभक्ति से मनोकामना पूर्ति,कारक है महीना।।
शिवप्रिय सावन शुरुआत है,हार्दिक शुभकामनाएँ।
आप सभी को सपरिवार,मेरी ढेरों शुभकामनाएँ।।
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रचयिता :
*ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.
(शिक्षक कवि लेखक साहित्यकार समीक्षक समाजसेवी)



