
ईश शक्ति ने , ही रचा ये जहान है ।
हाथ जोड़ के , खड़ा ये आसमान है।।
पर्वत गाते , तेरा स्वागत गान हैं ।
दीन -हीन जन ,जीवों के भगवान हैं ।।
बादल बिजली , कुदरत अद्भुत सार है।
जीव जगत पर , बरसे प्रेम फुहार हैं ।।
प्राणी की वे ,सुनते करुण पुकार हैं
दौड़े आए , भक्तों के घर – द्वार हैं ।।
दुर्जन ने भी , माना तारनहार को ।
भक्तों ने भी , जाना है प्रभु प्यार को।।
सिंधु धरा भी , तेरा रूप प्रकार है।
दिव्य सृष्टि में , तेरा ही उपकार है।।
सूरज उगते , भाग अंधियार है।
पक्षी चहके , खिले पुष्प संसार है।
है तलाश सब , पक्षियों को शिकार की।
फूल गंध दे , पता बागे बहार की ।।
तू जग नायक , तेरी कृपा महान है ।
होठों पर रहता , तेरा ही गुणगान है।।
तू दुनिया का , न्यारा खेवनहार है ।
डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवीमुम्बई




