साहित्य

ईश उपकार प्लवंगम छंद 

डॉ मंजु गुप्ता

ईश शक्ति ने , ही रचा ये जहान है ।

हाथ जोड़ के , खड़ा ये आसमान है।।

पर्वत गाते , तेरा स्वागत गान हैं ।

दीन -हीन जन ,जीवों के भगवान हैं ।।

 

बादल बिजली , कुदरत अद्भुत सार है।

जीव जगत पर , बरसे प्रेम फुहार हैं ।।

प्राणी की वे ,सुनते करुण पुकार हैं

दौड़े आए , भक्तों के घर – द्वार हैं ।।

 

दुर्जन ने भी , माना तारनहार को ।

भक्तों ने भी , जाना है प्रभु प्यार को।।

सिंधु धरा भी , तेरा रूप प्रकार है।

दिव्य सृष्टि में , तेरा ही उपकार है।।

 

सूरज उगते , भाग अंधियार है।

पक्षी चहके , खिले पुष्प संसार है।

है तलाश सब , पक्षियों को शिकार की।

फूल गंध दे , पता बागे बहार की ।।

 

तू जग नायक , तेरी कृपा महान है ।

होठों पर रहता , तेरा ही गुणगान है।।

तू दुनिया का , न्यारा खेवनहार है ।

 

डॉ मंजु गुप्ता

वाशी , नवीमुम्बई

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