
दिन निकलता था हँसी होंठों पर थी,
बचकाना बचपना था पूरी मस्ती थी,
जैसे जैसे समझदार होते गये हम,
बिना मुस्कुराये शामें ढल जाती हैं अब।
इस संसार में हर चीज़ बदलती है,
कर्तव्य करते रहें, जीवन बदलता है,
क़र्म अच्छे करें, तो किसी का दिन
और किसी का दिल भी बदलता है।
अगर खुद से हिम्मत नहीं हारे,
तो संघर्ष में विजय निश्चित है,
यदि फिर भी विजय नही मिलती,
तो अनुभूति निश्चित मिलती है ।
ख़ुशियाँ आती हैं, एहसास होता है,
वजह कोई भी हो विश्वास होता है,
हमारी ख़ुशियों के लिये कोई कहीं,
अपने सच्चे दिल से दुआयें कर रहा है।
प्यार, सुख, शान्ति व जीवन की ख़ुशी,
औरों के साथ बाँटने से बढ़ती हैं,
जितना हम इन्हें औरों में बाँटते हैं,
उससे ज़्यादा वापस लौट आती हैं।
जिंदगी खेलती उसी के साथ है,
जो खिलाड़ी बेहतरीन होता है,
दर्द तो सबके एक जैसे होते हैं,
पर हौंसले सबके अलग होते हैं।
प्रारम्भ तो स्वप्न देखने से होता है,
कोई निराशा में ही बिखर जाता है,
कोई संघर्ष करके निखर जाता है,
पर बढ़ता वही है, जो बदल जाता है।
अध्यात्म और ध्यान यक़ीन दिलाते हैं,
परमात्मा साथ है, एहसास दिलाते हैं,
आदित्य कौन साथ है कौन ख़िलाफ़ है,
ऐसी हर एक चिंता से मुक्त हो जाते हैं।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ




