साहित्य

अगले जन्म का, वादा 

वन्दन पूज्य डॉ साहब

छोड़ने से पहले हमारा, अगले जन्म में मिलने का वादा, याद अ गया आज, मैने कहां में किसी लड़की के पैसे नहीं लेता हूं और मै दुकानदार को पैसे देने लगा, तुमने बीच में रोक दिया दुकानदार को , वह भी रुक गया, वैसे भी वह मेरा दोस्त था, जब वह बोला, और रामू कैसे हो

तुम चौंक गई, बोली अरे आप इन्हें जानते हैं, वह मुस्करा रहे बोला, इन्हें कौन नही जानता हूं सारा शहर जानता है, वैसे हम भी एक साथ पड़े हैं, मैने उसे तुम्हारा परिचय दिया, खैर, तुमने मुझे पैसे देने से रोका, यह कहती हुए कि कुछ कर्ज़ रहने दो, ताकि अगले जन्म में हम फिर मिले, में तुम्हारी तरफ़ ध्यान से देखने लगता हूं, तुम नजरें नीचे कर लेती हो, ताकि में तुम्हें देख संकू आराम से, खैर मैने वहां ज्यादा जिद्द नहीं की, वैसे भी तुम से डरता था, तुम जो सोच लेती हो करती हो

तुम्हारी खुशी के लिए अक्सर मुझे

तुम्हारी बातों को स्वीकार करना होता है, जानती तुम भी हो, में भी वही करता हूं जो सोच लेती हूं पर

तुम्हारे आगे हार स्वीकार करने का भी एक आनंद है यह भी तुम जानती थीं, खैर तुम ले गई थी मुझे

इसलिए ज्यादा नहीं बोला

बस सुकून मिलता है, तुम्हारा अगले जन्म में मिलने का वादा याद कर यही वजह है कि कुछ और छोटी राशि तुम जानते हुए नहीं देती ताकि अगले जन्म में कर्ज उतारने के बहाने फिर मिलना हो, वरना तुम जो बेहद स्वाभिमानी हो बहुत बहुत अच्छी तरह जानता हूं यह सब कुछ

अच्छा लगता था मुझे, तुम्हारा यह स्नेह प्यार और अपनापन की, आज हमारी विवशता है तो क्या हुआ अगले जन्म में हम लोग फिर मिलेंगे,,,,,,,, मुझे भी याद कार अच्छा लगता हैं यह सुख सुकून, चलों इस जन्म में नहीं तो क्या हुआ

अगले जन्म में ही सही मिलना तो होगा, बहुत है यह सुखद ख्याल भी

जीने के लिए,,,,,, और में मुस्करा कर सो जाता हूं

 

 

 

डॉ रामशंकर चंचल

झाबुआ मध्य प्रदेश

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