
बनाना आसान है
पिता का किरदार
ईमानदारी से निभाना
बहुत बहुत मुश्किल होता हैं
बहुत कुछ सहन करना होता हैं
सब की सुन चुप रहना होगा
सब के लिए जीना होगा
दुनियां को सत् सत् प्रणाम
करते हुए जीवन व्यतीत करना होगा, सभी अपमान और तिरस्कार
चुप हो सहन करना होगा
महा ग्रंथ है लिखा जा सकता है
साहब, पिता ही जो
बच्चों का भविष्य है
बच्चों का सुख सुकून है
बच्चों की ताकत है
पिता ही है
दुनियां में जीता जागता
हर पल,हर समय
बच्चों के साथ रहता
साक्षात ईश्वर
यह अद्भुत सत्य है
मैने देखा है
मेरे पिता को
उन्हीं से सीखा है
पिता क्या है
कोशिश करता हूं
उनका अंश मात्र
अमल कर
पिता का दायित्व
निभा संकू
प्रणाम पिता
सत् सत् प्रणाम
दुनियां के तमाम
पिता को
सत् सत् वंदन
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश




