
आज रंग में खेलूंगी रसिया,
व्रज में होरी मचाई रसिया! आज…!
तुम तो श्याम चतुर रसिया,
न समझो सीधी नार रसिया! आज….!
होरी खेलूंगी फूलों की में रसिया,
तुम हो नार नवल रसिया! आज……!
हरे लाल रंग घुल जायें,
श्याम रंग मन भाये रसिया! आज..,..!
लट्ठ मार होरी व्रज में,
अपने को कैसे बचाओ रसिया! आज…!
भर पिचकारी रंग की मारी,
चूनर आन भिगोयी रसिया! आज..,.!
श्याम रंग में रंग गई राधा,
सबके मन को भाये रसिया! आज…..!
तुम तो श्याम छैल छबीले
नैनन वाण चलाये रसिया! आज……!
डॉ उषा जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




