
विचार क्रांति साहित्य मंच सिंगरौली मध्य प्रदेश के संस्थापक महोदय जी के द्वारा ऑनलाइन कविता लेखन प्रतियोगिता का आयोजन पटल पर किया गया था जिसमें सुनील कुमार खुराना ने भी प्रतिभागी किया। संस्था के संस्थापक महोदय के द्वारा 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस के प्रसार और प्रचार के लिए विषय आधारित तंबाकू नशा नहीं यह मौत की पुड़िया है प्रतियोगिता का आयोजन किया । संस्था के संस्थापक महोदय राजकुमार जायसवाल के द्वारा सुनील कुमार खुराना को विचार क्रांति नशा मुक्त भारत सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया है। सुनील कुमार खुराना उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के नकुड़ कस्बे के एक प्रख्यात कवि, गीतकार और साहित्यकार हैं। वे साहित्य जगत में अपनी राष्ट्रप्रेम, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक विषयों से ओत-प्रोत रचनाओं के लिए जाने जाते हैं। सुनील कुमार खुराना साहित्य सेवा के साथ-साथ नकुड़ के बाधी गांव में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। रेडियो प्रसारण फरवरी 2025 में उनकी कविताओं का प्रसारण आकाशवाणी नजीबाबाद (ऑल इंडिया रेडियो) पर भी किया गया था। साहित्य जगत में उनकी निरंतर सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक उनके 170 से अधिक साझा संकलन प्रकाशित हो चुके हैं।वे कई डिजिटल और जमीनी मंचों जैसे ‘सत्य साहित्यिक गंगा मंच’ के कार्यक्रम कलम की ताक़त और राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएँ साझा करते रहते हैं।
सुनील कुमार खुराना की कविता मानवीय संबंधों, जीवन के संघर्ष और सफलता में अपनों के योगदान को रेखांकित करती है।”जीवन में मेरे अगर तुम ना होते, हमारा साथ दो कभी कोई ना देते।जीवन के मेरे सुंदर सफर ना होते, तूने सदा ही साथ दिया अपना।साथ तेरा बन गया मेरा सपना, सपने अपने कभी ना पूरे होते…”। सुनील कुमार खुराना ने अनेक विषयों पर अपनी कविताएं लिखी जिन्हें लोग पढ़कर समाज हित में अपना योगदान दे रहे हैं।




