साहित्य

विश्व योग दिवस: दुनिया को भारत की देन।

दिनेश चन्द्र गुरुगरिया

जब युद्धों ने मानवता के आँगन में अंगार बिछाए,

हिंसा, भय और वैमनस्य ने रिश्तों के सब फूल झुलसाए।

तब योग ने सहिष्णुता बन घावों पर मरहम धर डाला,

शांति, संयम और सद्भावों का फिर से दीप जला डाला।

 

आज विश्व योग दिवस केवल उत्सव का एक क्षण नहीं,

यह मानवता की सामूहिक चेतना का अभिनंदन है यहीं।

यह संदेश कि साथ चलें हम, साथ बढ़ें, साथ मुस्काएँ,

अपने भीतर के ईश्वर से प्रतिदिन नूतन संबंध बनाएँ।

 

आओ हर वर्ष नहीं, प्रतिदिन योग-पथ का सम्मान करें,

तन की शक्ति, मन की शुद्धि, आत्मा का उत्थान करें।

भारत ने जो अमूल्य धरोहर विश्व-वसुंधरा को दी है,

उसके प्रकाश से मानवता की हर राह आलोकित की है।

 

“द्विज” विश्व योग दिवस का यह उद्घोष सदा संसार में गूँजे—

“योग बने जीवन की संस्कृति, शांति बने मानव का पूँजी।

प्रेम, करुणा और समरसता से जग का नव निर्माण हो,

भारत के इस दिव्य उपहार से विश्वमंगल का गान हो।” ॥

 

✍️

दिनेश चन्द्र गुरुगरिया ‘द्विज’

पीसांगन अजयमेरू राजस्थान

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