
कुण्डलिया छंद विषय- अधीर
मन जपना हरि नाम को, होते नहीं अधीर।
प्रभु सबकी ही सुन रहे, वही हरेंगे पीर।।
वही हरेंगे पीर, सदा मन धीरज रखना।
बनते हैं सब काम, सकल फल मीठा चखना।
उषा कहे कर जोर, राम का करना समुरिन।
होगी आशा पूर्ण, सुखी हो तेरा तनमन।।
जीवन सुखदुख ही मिले, होना नहीं अधीर।
हिम्मत जो प्राणी रखे, बहते कभी न नीर।।
बहते कभी न नीर, बसा मन प्रभु को रखना।
सरल सदा हों भाव, भला तुम सबका करना।
सत्य चुनो तुम मार्ग, श्याम मन रखना सीवन।
कटुता जाओ भूल, प्रेम मय होगा जीवन।।
स्वरचित
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश



