
इन्सान अच्छा होने लग जाए
तो भी अखरने लगता है!!
क्या करेंगे ज़िन्दगी की बातें
हर तरफ मौत का सिलसिला है!!
तादाद अब अच्छो की बढ़ने लगी है
दुश्मनी अपने आप में एक सज़ा है!!
उसने चोट खाकर यही सीखा
दिल भी एक जरूरी मसला है!!
किससे करते हैं वह वफ़ा की बातें
कौन किसकी यहाँ सुन रहा है!!
ठोकर लगेगी तब संभल जाएंगे
अगर यही है अंजाम तो क्या बुरा है!!
उनके नज़रों में हम नहीं ठहरे
जिसके दिल में पहले से ख़ुदा है!!
जफ़ा मिली तो बहुत पछताया
क्या मोहब्बत की यही सज़ा है!!
तुम्हारे आँगन में तो फूल खिलते हैं
महज़ कांँटो के लिए मेरा घर बचा है!!
तुम्हारे आंँगन में फूल खिलते हैं…
स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान



