
मोहब्बत में लड़ना मना है
चाहे कितनी ही बड़ी तल्ख़ियां है!!
दिल आजकल कोई नहीं देखता
शायद पैसों पर आशना है!!
ज़मीर देर से जागा वर्ना
हक़ीक़त ज़बान से बयां है!!
जाने वाला जाकर चला गया
इश्क़ बस होने पर पशेमाँ है!!
क्या ग़लत क्या सही सब माफ़
शायद यह रंजिश का ख़ातिमा है!!
हर तरफ़ प्यार है शोहरत है
मगर हक़ीक़त में हम कहांँ है!!
दोस्ती नाम की बस रह गई
दुश्मनी में बड़ी सज़ा है!!
हम उन्हें याद भी नहीं आते
वर्ना रंगों में वो रवा है!!
जान में जान आई तो सांँस लोटी
मौत ज़िन्दगी की दवा है!!
कब तक रहेगा साथ मालूम नहीं
हमारी उम्र से ज़्यादा ग़लतियांँ हैं!!
स्वरचित- राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान




