साहित्य

गुरु पूर्णिमा

डॉ उषा

नमन करूँ गुरुदेव को, जग के पालन हार।

करें कृपा मुझपर सदा, देते जीवन सार

 

जब मैं हिम्मत हारती, पड़ती गुरु के पॉंव।

देकर गुरु जी सांत्वना, करते मुझ पर छॉंव।।

 

आदियोगी रूप रहे, सप्त ऋषि दिए ज्ञान।

पहले गुरु शिव ही बने, योग जगत पहचान।।

 

वेदव्यास का अवतरण, हुआ दिवस जो आज।

गुरु पूर्णिमा यह दिवस, शिक्षा के सरताज।।

 

नित्य नमन मैं कर रही, गुरु का ध्यान लगाय।

सुभग शांति सबको मिले, ज्ञान मिले सुख पाय।।

 

पूर्ण सदा फल गुरु मिले, दर्शन दिये कराय।

ज्ञान सदा देते रहे, सच की राह बताय।।

 

ठौर न मिलती गुरु बिना, झटपट लेना खोज।

देर न हो जाए कहीं, सच का देते भोज।।

 

जो गुरु का पूजन करे, मिट जाए भटकाव।

उत्तम हुए विचार है, आध्यात्मिक हो भाव।।

 

आया गुरु के पास जो, तजकर माया मोह।

ज्ञान ताप से यूँ गले, गलता जैसे लोह।।

स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित

डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण

छतरपुर मध्यप्रदेश

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