
चारों तरफ़ खिले फ़ूल पलाश के
सरसों की भीनी सुगंध फैली हवा में
फागुन के स्वागत में
प्रकृति ने किया है अनूठा श्रृंगार
आम पर बौरें हैं आई
नई नई कलियों का यौवन है फूटा
तितलियों और भौरों की बहार है आई
सरसों के पीले फूल की चादर है बिछाई
देखो फागुन की बहार है आई
गेहूं की फसलें पकते ही
बन जाती हैं हंसिया होरी
गा रहे रंग रसिया होरी
डारे इक दूजे पे रंग गुलाल
हो गए सब के रंग बिरंगी गाल
चढ़ा सब पर प्रेम का ऐसा रंग
ख़ुशी से झूमे सबका तन मन
आओ हम सब साथ खेले होली।।
डॉ. अनीता शाही सिंह
असिस्टेंट प्रोफेसर
प्रयागराज




