
भाव जगत में खो गए हम
जीवन के संग हो गए हम
खबर नहीं अब पीछे की
आगे के पल हो गए हम।
सागर से भी गहरा हमको
दिखता नील गगन का तल
चांद सितारे सूरज मिलकर
हो गए अब तो एक ही रंग।
मन्द पवन संग उड़ते जायें
ओस बूंद की नगरी में
देख वहां से स्मित रेखा
भमरों की धुन गुंजन हम।
प्यास भी अब क्या पाने की
विश्व भावना पाये हम
बने रहें हम भावों के
भाव हमारे चेतन संग।
डॉ.उमा रानी दुबे
जयपुर, राजस्थान




