रिमझिम रिमझिम मेघ बरसते,
वर्षा संग गाते गीत सावन के।
मेघों के घन से चमके बिजुरी,
जगते स्वप्न सार मेरे मन के।
झर झर गिरती बारिश की बूंदे,
तड़ तड़ करती पत्तों के दल से।
झूम झूम खुशियां सब मनाती,
वृक्षों की डालियां हंस हंस के।
झूले पर हंस बतियाती बालाएं,
पेंग बढ़ाती मन के अंतर्मन से।
भीगा तन मन जब बरसे सावन,
प्रेम रसधार बहे भर भर के।
नाचे बिजुली और बादल गरजे,
थिरक थिरक हंस उतरी बूंदे।
धानी रंग की धरा पहन चुनरिया,
स्वागत करता उपवन हंस के।
मीना तिवारी
पुणे




