साहित्य

मित्र

नन्दलाल मणि त्रिपाठी

मित्र सम्बन्ध सुगंध

मित्र जैसे पुष्पपराग

रस मिठास माधुर्य

महत्व मित्र!!

 

मर्यादा ह्रदय कि

गहराई निर्वाध संग

चलते रहना!!

 

सुख दुःख संघर्ष

युद्ध मे सारथी

सचिव सलहकार!!

 

रणनीतिकार सहयोगी

योगी रचनात्मता का

सार संसार

 

मित्रता रिश्ता जीवन

पवित्रता पथ जीवन मे

अंधकार मे ज्योति आशा

विश्वास!!

 

मित्र भ्रम का निवारण

मित्र दनवता विनाशक

मित्र रिश्ता भाव नहीं

मित्र रिश्ता औपचारिक नहीं

रिश्ता रहस्य अविश्वास

संदेह नहीं!!

 

मित्र रिश्ता घात नहीं

मित्रता आभार धन्यवाद

नहीं!!

 

मित्र मर्म धर्म कर्तव्य बोध

दायित्व दर्द हमदर्द हमराह

हमराज!!

 

मित्रता मे धन धान्य

आवश्यक नहीं मित्रता

सम्बन्ध का ऐसा संयोग

निर्मित कर ले नव राज्य

साम्राज्य!!

 

मित्रता सम्बन्धों का

मर्म ऐसा निष्पक्ष निष्कपट

सम्बन्ध मित्रता निर्विकर

मित्र के लिए जीवन मित्रता

धर्म निर्वाह!!

 

मित्रता विवशता नहीं

मित्रता लज्जा लिपसा नहीं

मित्रता सर्वत्रता सर्व ग्राहता

सर्व स्वीकार्यता सर्वाग्यता

सारभौमिकता चैतन्यता!!

 

मित्रता लाचारी नहीं

नम्रता मित्रता मन

मानव मनवता रिश्तो

कि समर्थता!!

 

मित्रता जन्म

जीवन मे रिश्ता संबंध

ऐसा?

जन्म से नहीं स्वंय

अनुसंधान शोध बोध

खोज प्रयोग परिणाम

कि संसारिकता

समाज कि परिपक्वाता!!

 

मित्रता सदैव विजय

मित्रता पराजित करता

पराजय मित्रता!!

 

हर्ष उत्कर्ष उत्सव

उत्साह का वाह

सम्बन्ध प्रवाह मित्रता!!

 

नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीतांवर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!

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