
अंधेरी रात होती भयानक है
आना जाना मुश्किल होता है
इससे पेड़ ध्वनि से झूमते है
हवाएं भी जोर जोर से बहते है
इस रात दिल में हलचल हो
रास्ते में चलना भय लगता है
दीपक की कांति नहीं होती है
नभ में तारें गायब हो चुका है
भय से मंजिल को जाना है
इस रात दिल में तनाव बढ़ता।
अंधेरी रातों में चोर दिखता है
वे लोगों से निरंतर सताते है
कभी कभी शैतान दिखता है
उन्हें देखे तो लोग डर लगता
इस रात दिल कांप उठता है।
अंधेरी रात में दुर्घटना होगा
इसे मृत्यु भी संभव होगा
इसे सावधान से जायेगा
अंधेरी रात एक कसौटी होगा
इस रात दिल में भय बढ़ता।
श्रीनिवास यन, साहित्यकार
आंध्रप्रदेश




