साहित्य

मनहरण घनाक्षरी छंद 

डॉ गीता पांडेय

अवगुण तज सभी,प्रभु गुण भज अभी,

सत पथ पर चल,राम नाम जपिए।

मिल जुल साथ रहें,झुके हुए माथ रहें,

अपनों से नाता जोड़,सुख धाम करिए।।

ज्ञान की अलख जगा, राग द्वेष सब भगा

नए कीर्ति मान गढ़,सुख हिय भरिए।

मात-पिता रखो पास,पूर्ण करो हर आस,

मधुरिम जीवन हो,पीर दीन हरिए।।

 

राम नाम है आधार,करे सदा बेड़ा पार,

औषधि सा गुण भरा,बात मान लीजिए।

ध्यान धरें प्यारा नाम,सभी जपे आठों याम,

ललित ललाम अति, गुणगान कीजिए।।

दूर करे है विकार,भरता है ज्ञान सार,

होती नहीं कभी हार,सुधा रस पीजिए।

कहते हैं प्रभु यही,चलो नित राह सही,

दीन-हीन यदि मिले,उन्हें दान दीजिए ।।

 

करे भक्त अरदास,पूरी करे राम आस,

दूर होगा पाप ताप,लगन लगाइए।

मन बसे राम नाम,भजें सब आठों याम,

कृपा करे अविराम,भक्ति तो दिखाइए ।।

युग अवतार राम,पूर्ण करें हर काम,

सुख कर होगा धाम,आसन सजाइए।

हरो प्रभु जी विकार,करो उर में बिहार,

गीता की विनय यहीं,मान प्रभु जाइए।।

 

डॉ गीता पांडेय अपराजिता

सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

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