
सावन सुरीला आगया,अगवानी कीजिए
मौसम रंगीला आ गया,अगवानी कीजिए
सावन…..
ये कारे-कारे मेघा,छम-छम बरसता पानी
धरती से मिलने आ गया…
दामिनी दमक रही है,पपीहा पुकारता है
चातक भी सुर मिला गया..
सूखे थे जो सरोवर,सिमटी थीं जो तलैंयां
उनमें उफान आ गया….
दिन में कमल विहँसते औ’रात में कुमुदिनी
सारस का जोड़ा आ गया…
देखे जो कारे मेघा , तो नाचता मयूरा
कान्हा की सुधि दिला गया…
गाएंँ मल्हार सखियां पींगें बढ़ा२ के
पीहर बड़ा मन भा गया….
चूड़ी हरी हरी हैं और लाल २ मेंहदी
गजरा भी गजब ढा गया…
सावन……..
आशा बिसारिया चंदौसी



