
का करिहौ जब सबै हैं पागल अपने ही मन का करत हैं जो,
अम्मा बप्पा सब ठाढ़ हुहैं,हया नाहि,बीबी से बात करत हैं जो
हमरे समय म बीबी से,बतलाब बड़ा जस पाप होए,
अंजु तौ खोपड़ी म चढ़ि के बहुरेवा द्याखौ बात करत है जो
दूसरन का हम का बताइ, सन् अस्सी म बिटिया भयी पैदा,
न दीख बिटेवा का मुह ही न पत्नी का हालु जो कीन्हेस पैदा
गोदी म तौ महिनन बाद लीन जब लै गैन अपन तैनाती पर,
अब तौ मजबूरी रहै,तबै,हम जाना हालु जब बिटिया पैदा।।
घर हि म धनकुन करेस सबै नारु छ्वार की किरिया कीन्हेस
बस हफ्ता भरेम चंगी होइ गई, घर का संवरि का भोजन कीन्हेस
न कौनव ड्रामा न अउर कुछौ,घर का बना हरीरा बहुतै,
घिउ मेवा सोंठ ताकत की चीजै,शरीर का चंगा यहै कीन्हेस।।
हां एकु बड़ा सुखु दीख तबै, चिंता न हमका कवनेव
मालिक मुखिया का कामु यहै दखल हमार न कवनेव
अंजु न्युक्लियर फैमिलियन महिआ,खुदै सबै कुछ करना है
सुख दुख कुछौ परै तुम पर, नाभि देखैया कवनेव।।
अवधेश कुमार श्रीवास्तव उन्नाव उत्तर प्रदेश




