साहित्य

नमन पटल का करिहौ

अवधेश कुमार

का करिहौ जब सबै हैं पागल अपने ही मन का करत हैं जो,

अम्मा बप्पा सब ठाढ़ हुहैं,हया नाहि,बीबी से बात करत हैं जो

हमरे समय म बीबी से,बतलाब बड़ा जस पाप होए,

अंजु तौ खोपड़ी म चढ़ि के बहुरेवा द्याखौ बात करत है जो

 

दूसरन का हम का बताइ, सन् अस्सी म बिटिया भयी पैदा,

न दीख बिटेवा का मुह ही न पत्नी का हालु जो कीन्हेस पैदा

गोदी म तौ महिनन बाद लीन जब लै गैन अपन तैनाती पर,

अब तौ मजबूरी रहै,तबै,हम जाना हालु जब बिटिया पैदा।।

 

घर हि म धनकुन करेस सबै नारु छ्वार की किरिया कीन्हेस

बस हफ्ता भरेम चंगी होइ गई, घर का संवरि का भोजन कीन्हेस

न कौनव ड्रामा न अउर कुछौ,घर का बना हरीरा बहुतै,

घिउ मेवा सोंठ ताकत की चीजै,शरीर का चंगा यहै कीन्हेस।।

 

हां एकु बड़ा सुखु दीख तबै, चिंता न हमका कवनेव

मालिक मुखिया का कामु यहै दखल हमार न कवनेव

अंजु न्युक्लियर फैमिलियन महिआ,खुदै सबै कुछ करना है

सुख दुख कुछौ परै तुम पर, नाभि देखैया कवनेव।।

 

अवधेश कुमार ‏श्रीवास्तव उन्नाव उत्तर प्रदेश

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