
डाक्टर रुप कुमार बनर्जी
होमियोपैथिक चिकित्सक
गर्मी और बरसात के उमस भरे मौसम में अधिकांश लोग पसीने से परेशान हो जाते हैं। थोड़ी-सी गर्मी लगते ही पंखा, कूलर या ए.सी. की तलाश शुरू हो जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में आने वाला पसीना हमारे शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था है? यह न केवल शरीर का तापमान नियंत्रित रखता है, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण संकेत है।
पसीना क्यों आता है? :- हमारे शरीर का सामान्य तापमान लगभग 37°C होता है। जब गर्मी, शारीरिक परिश्रम, व्यायाम या तनाव के कारण तापमान बढ़ता है, तो त्वचा में मौजूद स्वेद ग्रंथियाँ (Sweat Glands) सक्रिय होकर पसीना निकालती हैं। यह पसीना त्वचा से वाष्पित होकर शरीर को ठंडा करता है और तापमान को संतुलित बनाए रखता है। यही प्रक्रिया हमें लू (हीट स्ट्रोक) जैसी गंभीर स्थिति से भी बचाती है।
पसीना आने के स्वास्थ्य लाभ :-
● शरीर को अधिक गर्म होने से बचाता है
व्यायाम या मेहनत के दौरान बढ़े हुए तापमान को नियंत्रित कर शरीर की सुरक्षा करता है।
● सक्रिय जीवनशैली का परिचायक
नियमित व्यायाम करने वाले लोगों में पसीना आना इस बात का संकेत है कि उनका शरीर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
● त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक
पसीने से त्वचा के रोमछिद्र साफ होते हैं और त्वचा अधिक स्वच्छ एवं ताजगीपूर्ण बनी रहती है।
● बेहतर फिटनेस का संकेत
नियमित शारीरिक गतिविधि से हृदय, फेफड़े और मांसपेशियाँ अधिक सक्षम बनती हैं। ऐसे लोगों में व्यायाम के दौरान पसीना आना सामान्य और लाभकारी होता है।
क्या पसीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं? :- यह धारणा प्रचलित है कि पसीना शरीर की पूरी सफाई कर देता है। वास्तव में पसीने के साथ पानी, नमक तथा थोड़ी मात्रा में यूरिया जैसे अपशिष्ट पदार्थ निकलते हैं, जबकि शरीर से अधिकांश विषैले तत्वों को बाहर निकालने का मुख्य कार्य किडनी और लिवर करते हैं। इसलिए पसीना शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसे पूर्ण “डिटॉक्स” नहीं माना जा सकता।
कब हो जाएँ सावधान? :- यदि बिना गर्मी, बिना मेहनत या आराम की अवस्था में भी अत्यधिक पसीना आने लगे, तो इसे सामान्य न समझें। यह कई बीमारियों का संकेत हो सकता है,जैसे हृदय संबंधी रोग,थायरॉयड की अधिक सक्रियता,मधुमेह में शुगर का अत्यधिक कम होना,संक्रमण या बुखार और कुछ तंत्रिका तंत्र संबंधी विकार।ऐसी स्थिति में शीघ्र चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है।
पसीने की दुर्गंध से कैसे बचें? :- स्वयं पसीना सामान्यतः गंधहीन होता है। दुर्गंध त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया के कारण उत्पन्न होती है। इसलिए नियमित स्नान करें, सूती एवं साफ कपड़े पहनें, पर्याप्त पानी पिएँ और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
✔ प्रतिदिन कम से कम 30–45 मिनट तेज़ चाल से चलें या व्यायाम करें।
✔ दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ।
✔ गर्मी में हल्के एवं सूती वस्त्र पहनें।
✔ अत्यधिक पसीना, चक्कर, सीने में दर्द या सांस फूलने जैसी शिकायत हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
✔ पसीने से घबराएँ नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया का सम्मान करें।
पसीना प्रकृति का वह अनमोल उपहार है जो हमारे शरीर को अधिक गर्म होने से बचाता है और उसे संतुलित बनाए रखता है। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में पसीना आने को बीमारी नहीं, बल्कि शरीर की स्वस्थ कार्यप्रणाली का हिस्सा समझें। हाँ, यदि बिना कारण अत्यधिक पसीना आए या उसके साथ अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें। “स्वस्थ शरीर, सक्रिय जीवन और संतुलित दिनचर्या यही उत्तम स्वास्थ्य का मूल मंत्र है।”
प्रस्तुतकर्ता विनय कुमार मिश्र




