साहित्य

छुपा हुआ राज

भावना मोहन

दिल कह रहा है आज,

कह दूं वह छुपा हुआ राज।

कि जिसके सब दीवाने हैं,

वो शम्मा और सब परवाने है।

 

दिल थाम कर पढ़ते थे,

बार-बार जिस लेखनी को।

उस कलम की रानी मैं,

उजागर करूं उस कहानी को?

 

कुछ राज छुपे हुए अच्छे हैं,

दिल की बात कहे तो देते हैं।

राज खुल गया सबके सामने,

जख्मों को फिर कुरेद देते हैं।

 

पर अब खामोश रहा नहीं जाता,

दिल का दर्द कहा नहीं जाता।

हां,मैं हूं कलम की रानी कह दूं सबसे,

लिखना शुरू किया घाव मिले हैं जबसे।

 

मेरा दिल कलम बन गया,

दर्द ने ले लिया स्याही का रूप।

बेरंग सी अपनी जिंदगी को लिखा,

जिसे मिली तकलीफों की धूप।

 

सौ, भावना मोहन विधानी ✍️

अमरावती महाराष्ट्र।

[03/07, 5:41 pm] +91 75070 00651: भावना मोहन विधानी अमरावती महाराष्ट्र

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